Mopla vridoh हिन्दुओ के नरसंहार को पड़ा दिया कृषि व्रिदोह

Ashish Singh 4
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Mopla vridoh हिन्दुओ के नर संहार को जब इतिहास में कृषि विद्रोह पढ़ाया गया। उस वक्त बापों के सामने धर्म बदल कर उनकी बेटियों का उन्ही के सामने निकाह करा दिया गया था। जबरन करा दिया गया था। जबरन धर्मांतरण यहाँ कराये गए , मंदिरों को ध्वस्त किया गया , महिलाओं के साथ कई अपराध वाली घटनाये की गई , यहाँ तक गर्भवती महिलाओं के पेट फाड़े गए थे। ऐसी ऐसी घटनाये हुईं थी उस वक्त जो आप सोच भी नहीं सकते की एक इंसान ऐसा कैसे कर सकता है ?


इसके बाद जब भारत इतिहास जाने लगा ,तब इस हिन्दुओ के नरसंहार वाली घटना को सिर्फ एक कृषि विद्रोह बताया था। भारत का इतिहास लिखने वालों ने सिर्फ इतिहास को गलत पढ़ाया ही नहीं बल्कि पूरा इतिहास ही गलत बताया और लिखा । और इसका सबसे ज्यादा असर हमारे युवा पीढ़ी पर पड़ा है। क्युकी वो कुछ जानते ही नहीं है। अपने देश की स्वर्णिम इतिहास के बारे में।

आज के बहुत ही कम युवा ऐसे है जो अपने देश के उस स्वर्णिम इतिहास को जानते है जिस स्वर्णिम इतिहास को पढ़कर और देखकर विदेशी ताकते जलन महसूस थी। और इस देश के कुछ दरबारी पत्रकार और इतिहासकार ऐसे ही घटिया लोगो के पैसो पर बिककर पूरा इतिहास ही उनके बताये गए तरीको से लिख दिया। और इस देश के उस इतिहास को छुपा र=दिया जो अपने आप में गौरवशाली है । इतना भव्य इतिहास है की कभी कभी ऐसा महसूस भी होता है की सचमुच भारत अगर सोने की चिड़िया बन जाए ऐसा ये वामपंथी और कुछ विदेशी ताकते जो अब इस देश के अंदर है वो नहीं चाहते की भारत विकास करे। युवा वर्ग शिक्षित हो।

हम आपको आज की घटना बता रहे थे। की क्या हुआ था आज के दिन इतिहास में। महाराष्ट्र में 19वीं शताब्दी के अंत में ऐसे हालात थे देश में की हिन्दुओं के लिए पूजा-पाठ तक अपराध हो गया था और मुस्लिम अक्सर हिन्दू जुलूसों पर हमले कर दिया करते थे। तो इसे भी ‘हिन्दू-मुस्लिम विवाद’ लिखा गया। जब की ये विवाद नहीं हिन्दुओ को तोड़ने और इस देश से भगाने की एक साजिस के तहत दी अंजाम दी जाने वाली घटना थी। एक और सच है की उत्तर भारत में शायद ही किसी को केरल के मालाबार में मोपला मुस्लिमों द्वारा हुए हिन्दुओं के नरसंहार हुआ था उसके बारे में पता हो।

महात्मा गाँधी जैसे नेता तक ने ‘खिलाफत आंदोलन’ का समर्थन कर के हिन्दुओं के कत्लेआम की तरफ से आँख मूँद लिया। और उस वक्त अंग्रेजों की नीति सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम तुस्टीकरण की रही थी।

‘मालाबार विद्रोह’, या अंग्रेजी में ‘Rebellion‘


अब बात करते है मोपला हिन्दू नरसंहार को अक्सर ‘मालाबार विद्रोह’, या अंग्रेजी में ‘Rebellion‘ कह कर सम्बोधित किया गया।जन्शंख्या के हिसाब से तो सिर्फ 27 परसेंट है लेकिन केरल राज्य से आतंकी संगठन ISIS में जाने वालों की अच्छी-खासी संख्या है।कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर ने कही है की तालिबान में भी ‘मलयालियों’ भी है । केरल में ईसाई भी ‘लव जिहाद’ से शिकार हो रहे है । लेकिन एक बात और है की केरल सबसे ज्यादा शिक्षित होने के बाद भी वहां के इतिहास में इस्लामी कट्टरपंथ की जड़ें ही हैं।

वामपंथी इतिहासकार के मुताबिक ये एक कहते हैं कि ये अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह था। लेकिन यहाँ कई सवाल पैदा हो जाते है की अगर ऐसा था, तो फिर मंदिर क्यों ध्वस्त किए गए थे? अगर ये ‘स्वतंत्रता संग्राम’ था, तो भारत के ही लोगों को अपनी ही धरती छोड़ कर क्यों भागना पड़ा था वो भी सिर्फ जिहादियों के डर से? हकीकत में बात ये है की वामपंथी इसे ‘मप्पिला मुस्लिमों का सशस्त्र विद्रोह’ कहते हैं। अगर ये विद्रोह था तो इसमें सिर्फ मुस्लिम ही क्यों थे? बाकी धर्मों के लोग क्यों नहीं? लगभग 6 महीनों तक हिन्दुओं का नरसंहार चलता रहा था, जिसमें 10,000 से भी अधिक जानें गईं। अरब के जो व्यापारी यहाँ बसे, उनका वंश भी फला-फूला। इस तरह केरल में मुस्लिमों की जनसंख्या बढ़ती चली गई।

ये केरल वही इलाका था, जहाँ हैदर अली और उनके बेटे टीपू सुल्तान ने हमले किए। पहले से ही पुर्तगाली यहाँ जमे हुए थे। ऊपर से मैसूर के आक्रमण ने यहाँ के हिन्दुओं को पलायन के लिए मजबूर किया। हिन्दुओं को जम कर लूटा गया था। कुछ लोगो को तो लोगों को इससे भी हैरानी थी कि यहाँ ‘मप्पिला मुस्लिमों’ की जनसंख्या कैसे अचानक इतनी बढ़ गई कि वो हावी हो गए। दो ही कारण हैं – ज़्यादा से ज़्यादा बच्चे पैदा करना और गरीब हिन्दुओं का बड़ी संख्या में धर्मांतरण।

1921 में वो समय आया जब महात्मा गाँधी ने मुस्लिमों का ‘विश्वास जीतने’ के लिए ‘खिलाफत आंदोलन’ को कॉन्ग्रेस का समर्थन दिला दिया। ‘खिलाफत’ मतलब क्या होता है ? ये आंदोलन सिर्फ और सिर्फ ऑटोमन साम्राज्य को पुनः बहाल करने के लिए हो रहा था। और इसका मतलब कुछ नहीं था। ये पूरा घटना क्रम सिर्फ इसीलिए था की तुर्की के खलीफा को पूरी दुनिया में इस्लाम का नेता नियुक्त कर दिया जाए सिर्फ इसीलिए ये सब हो रहा था।

उस वक्त न भारत को तब तुर्की से कोई लेनादेना था और न ही ऑटोमन साम्राज्य से। लेकिन, महात्मा गाँधी ने मुस्लिमों को कॉन्ग्रेस से जोड़ने के लिए उनके एक ऐसे अभियान का समर्थन कर दिया, जिसके दुष्परिणाम हिन्दुओं को भुगतने पड़े। वो 18 अगस्त, 1920 का समय था जब महात्मा गाँधी ‘खिलाफत’ के नेता शौकत अली के साथ मालाबार आए। सिर्फ असहयोग और खिलाफत’ के लिए ‘ जागरूक’ करने आए थे।

महात्मा गाँधी भी इस भुलावे में जीते रहे कि मुस्लिमों ने ‘असहयोग आंदोलन’ का समर्थन कर दिया है। लेकिन, इससे ये ज़रूर हुआ कि ‘खिलाफत’ की आग में मोपला मुस्लिमों ने हिन्दुओं का बहिष्कार शुरू कर दिया। हिन्दुओं को निशाना बनाया गया। उनकी घर-सम्पत्तियों व खेतों को तबाह कर दिया गया। कइयों का जबरन धर्मांतरण करा दिया गया। कॉन्ग्रेस पार्टी ने अंग्रेजों पर दोष मढ़ कर इतिश्री कर ली। हिन्दुओं को बचाने कोई नहीं आया।

डॉक्टर आंबेडकर लिखते हैं, “अंग्रेजों के खिलाफ को तो जायज ठहराया जा सकता है, लेकिन मोपला मुस्लिमों ने मालाबार के हिन्दुओं के साथ जो किया वो विस्मित कर देने वाला है। मोपला के हाथों मालाबार के हिन्दुओं का भयानक अंजाम हुआ। नरसंहार, जबरन धर्मांतरण, मंदिरों को ध्वस्त करना, महिलाओं के साथ अपराध, गर्भवती महिलाओं के पेट फाड़े जाने की घटना, ये सब हुआ। हिन्दुओं के साथ सारी क्रूर और असंयमित बर्बरता हुई। मोपला ने हिन्दुओं के साथ ये सब खुलेआम किया, जब तक वहाँ सेना न पहुँच गई।

बाबासाहब आंबेडकर ने इसे हिन्दू-मुस्लिम दंगा मानने से इनकार करते हुए कहा था कि हिन्दुओं की मौत का कोई आँकड़ा नहीं है, लेकिन ये संख्या बहुत बड़ी है। आप इतिहास में जहाँ भी मोपला के बारे में पढ़ेंगे, आपको बताया जाएगा कि ये एक ‘कृषक विद्रोह था’, अंग्रेजों के खिलाफ था। लेकिन, इसकी आड़ में ये छिपाया जाता है कि किस तरह हजारों हिन्दुओं को मौत के घाट उतार दिया गया था।

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Ashish Singh

Namastey, Myself Am Ashish Singh, Founder & CEO of TTHNews.Com & ARV Digital Creations. I am YouTuber, Blogger SEO expert & expert of SMM. I have 130K+ Subscribers on my News YouTube Plateform & 30k+ Subscribers on personal channel. Beside this i also have 35k+ following on my instagram account. I am working on social media since 2016. I have worked with some India's top writers like, Prof. Madhu Kishwar. I have completed my three years Diploma in Electronics Engineering from Government Polytechnic College, Shahjahanpur . i completed my BTech degress in Electronic And Communication Engineering from SCRIET, CCS University, Meerut. Since three years I started generating interest in video content on social media site YouTube to aware public on social affairs and current affairs, therefore I created my YouTube channel TTH News. After one year, in April 2020, I started a web portal named TTHNews.com. Which is now widely read by a large number of audiences.
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4 thoughts on “Mopla vridoh हिन्दुओ के नरसंहार को पड़ा दिया कृषि व्रिदोह

  1. मोदी और अमित शाह और R.S.S के मोहन भागवत दुसरे गांधी बन गये है इन से बंगाल में हिन्दूओं का नर संहार रोका नहीं गया ,खुली आंखों से हिन्दुओं का नर संहार और पलायन देखते रहे , हिन्दू के वोटों से चुन कर आते काम जेहादियों को मजबूत करने में लगे हैं जब घर में ही जयचंद हो और दुश्मन की जरूरत नहीं है हिन्दुओं को अब भारत का इस्लामीकरण होना तय है हमने गलत नेता को चुना है केजरीवाल से भी दो कदम आगे है केवल योगी आदित्यनाथ जैसा जमीन से जुड़ा योगी युग पुरुष से ही आखिरी उम्मीद है , बाकी प्रभु इच्छा सब सनातनी भाई बहनों को प्रणाम

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